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शिक्षा हमारे समाज की आत्मा है
जो कि एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को दी जाती है।





गोपीनाथ महाविद्यालय देवली, सलामतपुर जनपद-गाजीपुर के उत्तरांचल में दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र में स्थित है जो पावन सलिल तमसा के दक्षिण में माँ चण्डिका एवं प्राइवेट बस स्टैण्ड बहादुरगंज के पार्श्व में अपनी स्थिति के कारण आकर्षण का एकमात्र केन्द्र है। शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले एवं सहज प्रवृत्ति रखने वाले ग्रामदेवली के स्व0 रामजी तिवारी द्वारा परिवार की यशस्वी परम्परा के अनुरूप इस ग्रामीण एवं समीपवर्ती क्षेत्र में उच्चस्तरीय शिक्षा के प्रसार हेतु महाविद्यालय की स्थापना की गयी।

महाविद्यालय का शिलान्यास मऊ जनपद के सुप्रसिद्ध शल्यक एवं शिक्षा के क्षेत्र में विशेष रुचि रखने वाले डॉ0 एस०सी० तिवारी द्वारा 19 जुलाई सन् 2000 में अपने कर कमलों द्वारा किया। आज मनुष्य अपने कर्तव्यों, मूल्यों, आदर्शो तथा परम्पराओं को छोङकर आधुनिक सभ्यता के अनुसार खुद को बदलने का प्रयत्न कर रहा है, यह सही भी है क्यों कि विकास तभी होगा जब बदलाव होगा किन्तु यहां यह कहना गलत नही होगा कि अपनी परंपराओं में बदलाव तो सही है, लेकिन उन्हें छोड़ना गलत है। आज समाज को एक ऐसी शिक्षा पद्धति की जरुरत है, जो समाज को विकास के सर्वोच्च स्तर पर उसकी परंपरा और संस्कृति को साथ लेकर जाए, उसे भुलाकर नहीं। इसी उद्देश्य को नींव बनाकर महाविद्यालय की स्थापना हुई और आज महाविद्यालय उसी उद्देश्य को पूरा करता हुआ विकास के शिखर पर पहुंचते हुए लगभग विश्वविद्यालय का स्वरुप हासिल कर चुका है। महाविद्यालय में छात्र/छात्राओं को उनकी सुविधानुसार शिक्षा ग्रहण करने हेतु अनेक विषयों के योग्य एवं विश्वविद्यालय से अनुमोदित शिक्षकों के द्वारा संचालन कराया जाता है।

पूर्वी उत्तर प्रदेश के इस ग्रामीण एवं पिछड़े अंचल में विश्वविद्यालय स्तर की शिक्षा को निर्धन एवं असहाय तथा साधनविहीन छात्र/छात्राओं को सुलभ एवं सुयोग्य बनाना इस महाविद्यालय का प्रमुख उद्देश्य है। आज के भौतिकवादी युग में स्वावलम्बन की दृष्टि से स्त्री शिक्षा उतना ही महत्वपूर्ण है जितना की पुरुष वर्ग की शिक्षा। बालिकाओं को दूरस्थ स्थानों पर जाकर शिक्षा ग्रहण करना अति दुर्लभ होता है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए इस क्षेत्र की बालिकाओं को भी अच्छी शिक्षा व्यवस्था की गयी है। महाविद्यालय छात्र/छात्राओं के सम्पूर्ण विकास को ध्यान में रखकर अनेक सांस्कृतिक, बौद्विक तथा रचनात्मकता का कार्यक्रम प्रतिवर्ष आयोजित कर प्रतिभाओं को सामने लाने का प्रयास करता है। छात्र/छात्राओं का सम्यक् विकास, उनके अन्दर देश भक्ति के संस्कार, उत्तम चरित्र निर्माण ही महाविद्यालय का उद्देश्य रहा है, जिसे महाविद्यालय प्रशासन आज भी बिना थके, बिना रुके पूरा कर रहा है और आगे भी करता रहेगा।