Discipline
व्यक्ति के व्यक्तित्व का प्रमुख साधन अनुशासन है। छात्र जीवन में अनुशासित रहें महाविद्यालय ऐसे शैक्षिक वातावरण के सृजन में •योगदान देता है। अनुशासन सकारात्मक एवं सृजनात्मक होना चाहिए, नकारात्मक एवं विध्वंसात्मक नहीं।
महाविद्यालय अनुशासन के वाह्य स्वरूप को अपनाता है तथा इसके आन्तरिक परिणति में विश्वास रखता है। इसी सन्दर्भ में कुछ अनुशासन सम्बन्धी नियम निर्धारित किये गये हैं-
- महाविद्यालय में छात्र / छात्राओं का प्रवेश अन्तिम है। यदि इनके द्वारा कोई अनियमितता बरती जाती है तो प्रवेश समिति, प्राचार्य, अनुशासनाधिकारी द्वारा प्रवेश निरस्त किया जा सकता है।
- महाविद्यालय बिना किसी कारण किसी भी छात्र का नामांकन विशेष परिस्थिति में निरस्त कर सकता है। इसके विरूद्ध कोई भी शिकायत अस्वीकार्य होगी।
- महाविद्यालय का प्रत्येक छात्र अनुशासनात्मक व्यवस्था में महाविद्यालय प्रशासन का पूर्ण सहयोग करेगा तथा महाविद्यालय के अन्दर एवं बाहर उसके द्वारा ऐसा कृत्य नहीं किया जाय, जिससे महाविद्यालय का नाम कलंकित हो।
- छात्र/छात्राओं को महाविद्यालय परिसर में परिचय-पत्र साथ रखना अनिवार्य होगा।
- छात्र/छात्राओं को महाविद्यालय परिसर की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना होगा।
- परिचय-पत्र रद्द होने या खो जाने पर शुल्क जमा कर उसकी द्वितीय प्रति प्राप्त की जा सकती है।
- विद्यार्थियों का चरित्र प्रमाण-पत्र अनुशासाधिकारी द्वारा प्रदान किया जायेगा।
यदि महाविद्यालय में छात्र/छात्राओं द्वारा अनुशासनहीनता की जाती है तो मुख्य अनुशासनाधिकारी एवं अनुशासन समिति द्वारा उचित दण्ड प्रक्रिया अपनायी जायेगी।
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पुस्तकालय सुविधा हेतु प्रत्येक विद्यार्थी को पुस्तकालय कार्ड लेना अनिवार्य होगा।
- विश्वविद्यालय मानक के अनुसार महाविद्यालय में प्रत्येक विद्यार्थी की 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य है।
- मानक अनुरूप उपस्थिति न होने पर विद्यार्थी को परीक्षा से वंचित किया जा सकता है ।
- अभ्यास शिक्षण तथा स्काउट गाइड के लिए महाविद्यालय द्वारा निर्धारित गणवेश ( यूनिफार्म ) अनिवार्य है। छात्र/छात्राओं के लिए निर्धारित गणवेश (यूनिफार्म ) अनिवार्य है।